मैं और मेरे अह्सास
शहीदों को नमन
देश के लिए कुर्बानी देनेवाले शहीदों को नमन करता हूँ l
पावन चरणों में शीश झुकाकर उसको आशीष भरता हूँ ll
उनके जीवन के कुछ पल को अपनी कवितामें लिखने l
गाथा पढ़ने को इतिहासों की अमर कहानी में सरता हूँ ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह