हम हमेशा यह मानकर चलते हैं कि हमारे काम, हमारी बातें, हमारी उपलब्धियाँ और हमारा व्यक्तित्व लोगों के दिलों में हमेशा के लिए दर्ज हो जाएगा, और इसी वजह से लोगों को प्रभावित करने मे अपने जीवन का अमूल्य समय गवां देते हैं जिस समय मे हम अपने अमूल्य जीवन का आनंद ले सकते थे । सच्चाई यह है कि समय के साथ लोग आगे बढ़ जाते हैं, उनकी प्राथमिकताएँ बदल जाती हैं और नई यादें पुरानी यादों की जगह ले लेती हैं।
आज जो लोग आपकी हर बात पर ध्यान देते हैं, वही कल किसी और की कहानी में व्यस्त हो जाते हैं। इंसान की याददाश्त भी बहुत कमजोर होती है, वह उन्हीं बातों को याद रखता है जो उससे गहराई से जुड़ी रहती हैं। इसलिए यह उम्मीद लगाना कि लोग हमेशा आपको याद रखेंगे, अपने आप को धोखा देने जैसा है। बेहतर यही है कि हम याद रखे जाने की चाह से मुक्त होकर वर्तमान में मन भरे जिएँ, अच्छे कर्म करें और कम से कम इतने लापरवाह बने कि किसी के याद रखें या भूल जाने से हमे कोई फरक न पड़े ...