भाग्य ने तुम्हें मेरी यात्रा का स्थायी साथी बनने का अधिकार नहीं दिया, पर मेरे हृदय ने तुम्हें अपनी सबसे पवित्र स्मृतियों में वह स्थान दिया है, जहाँ समय भी अपनी धूल नहीं बिछा सका। तुम मेरी मंज़िल नहीं बने, पर मेरी स्मृतियों ने तुम्हें कभी बीता हुआ भी नहीं माना-आज भी तुम वहीं हो, जहाँ सम्मान समय से बड़ा हो जाता है।