तुम हो तो मैं हूँ …
अगर मैं कभी बिखर जाऊँ तो …
तुम मुझे समेट लेना ।
अगर मैं हारने लगूँ तो …
अपनी बाँहों में मुझे लपेट लेना ।
अगर मैं अपना दर्द कह न पाऊँ तो …
कुछ मत पूछना,बस मेरा हाथ थामकर
मेरे पास बैठ जाना ।
अगर रात मेरी आँखों से
नींद छीन ले तो …
मेरे सिर पर अपना हाथ फेर देना ।
और जब मैं थककर सो जाऊँ तो …
मेरा हाथ थामे तुम भी सो जाना ।
मुझे तुमसे कुछ ज़्यादा नहीं चाहिए,
बस इतना वादा करना—
ज़िंदगी चाहे जैसे भी मोड़ ले,
तुम मेरा साथ न छोड़ना ।
उषा जरवाल ‘एक उन्मुक्त पंछी’