जिस क्षण तुम्हें स्वयं से कुछ भी छिपाना न पड़े,उसी क्षण तुम्हारी आध्यात्मिक यात्रा वास्तव में प्रारम्भ होती है
संसार को धोखा देना सरल हो सकता है,पर अपनी अंतरात्मा को नहीं, जो व्यक्ति स्वयं के सामने सत्य के साथ खड़ा हो जाता है,उसे किसी प्रमाण की आवश्यकता नहीं रहती...
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