क्या ज़िंदगी में सबकुछ पा लेना ही ज़िन्दगी जीने का नाम है ।
मैं कहेती हूँ जी नहीं ..
ज़रीरू होता है बहुत कुछ छोड़ना,
जरूरू होता है ज़िन्दगी में आगे बठना,
कुछ लोग हमारी ज़िन्दगी का एक छोटा सा क़िस्सा हो सकते है ।
लेकिन हमारी ज़िंदगी नहीं ।
मुख़्तसर ज़िंदगी को ख़ुद के लिए जीना सीखो ।
बेफ़िज़ुलीह जसब्बतों में कुछ नहीं रखा ।
राब्ता और वफ़ा ख़ुद से पहले करो क्या ज़िंदगी में सबकुछ पा लेना ही ज़िन्दगी जीने का नाम है ।
मैं कहेती हूँ जी नहीं ..
ज़रीरू होता है बहुत कुछ छोड़ना,
जरूरू होता है ज़िन्दगी में आगे बठना,
कुछ लोग हमारी ज़िन्दगी का एक छोटा सा क़िस्सा हो सकते है ।
लेकिन हमारी ज़िंदगी नहीं ।
मुख़्तसर ज़िंदगी को ख़ुद के लिए जीना सीखो ।
बेफ़िज़ुलीह जसब्बतों में कुछ नहीं रखा ।
राब्ता और वफ़ा ख़ुद से पहले करो ।