मैं और मेरे अह्सास
सुबह हो गई मामू
नींद में से जाग ज़रा सुबह हो गई मामू l
हों जा सजाग ज़रा सुबह हो गई मामू ll
कब तलक गद्दे पर सोया पड़ा रहेगा उठ l
जीने को भाग ज़रा सुबह हो गई मामू ll
नई शुरुआत नई ऊर्जा लेकर आया है तो l
सूरज को ताक ज़रा सुबह हो गई मामू ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह