चौपाई
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श्रम के वीर हमीं कहलाते।
नहीं कर्म अपने कतराते।।
हर मुश्किल से हम लड़ जाते।
फिर भी श्रम का मोल न पाते।।
हमको भी सम्मान मिला है।
खून पसीना रोज बिका है ।।
फिर भी हमें डरा न पाता।
श्रम से अपना रिश्ता नाता।।
सत्कर्मो की जीवन पूँजी।
इसके सिवा और क्या दूजी।।
मान धरोहर सबसे प्यारी।
फँस मत जाना दुनियादारी।।
सुधीर श्रीवास्तव