बचपन से मुझे आधा बांधा हुआ है.....
पढ़ने की इजाजत है
लेकिन घर से बाहर निकलने की नहीं।
बोलने की इजाजत है
लेकिन अपनी राय देने की नहीं।
काम करने की इजाजत है
लेकिन बाहर के काम करने की नहीं।
हंसने की इजाजत है
लेकिन दूसरों के सामने नहीं।
श्रृंगार करने की इजाजत है
लेकिन शादी से पहले नहीं।
घरवालो ने मुझे नाममात्र की हमेशा इजाजत दी है
लेकिन मैं भी इसी बात से बंधी हुई हूं।
✍️ अंतिमा 😊