आप बस आप ही रहे,
मैं मैं नहीं रहा,
इतना दूर मैं खुद से हो गया हूँ
चाहूँ अब मैं क्या, जो पहले नहीं चाहा!
इधर से उधर,
ना जाने किधर
मेरे अपनों का कहाँ है घर;
टूट गया क्यों मेरा सबर
बनते हो मेरे अपने
क्या तुमको है मेरी खबर!
इस दुनिया में मौहब्बत का
नाम कहाँ है रहा!
आप बस आप ही रहे
मैं मैं नहीं रहा।