जो तारें गिर गये जमीन पर
उन्हें फिर से आस्मां पे लगाने चलते हैं
चल बिछड़ों को बिछड़ों से मिलाने चलते हैं
तु है आस्मां का गुरुर
चाँद को ये बात बतानें चलते हैं
अब गिरा भी दो न बारिशें
मुरझा चुके फूल बादलों को दिखाने चलते हैं
हथेली पे रखकर पानी चुल्लु भर
सुरज की आग बुझानें चलते हैं
जमीं पे धड़कते ही कहाँ हैं दिल
अर्श पे धड़क दिल की बढाने चलते हैं
बहती है अर्श पे जो ताजी हवायें
घुटन अपनी वहाँ बताने चलते हैं
हमें मिलें हैं ख़्वाबों के पंख
चल उड़ते परिन्दों के मुंह चिढ़ाने चलते हैं