बस स्टैंड की वो भीड़-भाड़, हॉर्न का शोर और पसीने वाली गर्मी—सब कुछ एक पल में थम गया जब नील ने उसे देखा।
नील अपनी बस का इंतज़ार कर रहा था, हाथ में एक पुरानी डायरी थी। तभी सामने वाली बेंच पर आकर एक लड़की बैठी। पीले रंग का सूट, आंखों पर चश्मा और हाथ में एक उपन्यास। वह अपनी ही दुनिया में खोई हुई थी, जैसे आस-पास का शोर उसके लिए वजूद ही नहीं रखता।
नील ने अपनी डायरी खोली, पर शब्द जैसे गायब हो गए। वह बस उसे देखता रहा। वह लड़की कभी अपनी जुल्फें कान के पीछे करती, तो कभी पढ़ते-पढ़ते मुस्कुरा देती। उसकी वह एक मुस्कान नील के दिल की धड़कनें बढ़ाने के लिए काफी थी। इसे ही शायद 'पहली नज़र का जादू' कहते हैं।
अचानक बस का हॉर्न बजा—नील की बस आ चुकी थी। वह खड़ा हुआ, पर उसके कदम भारी थे। उसे नहीं पता था कि वह लड़की कौन है, कहाँ जा रही है, लेकिन वह उस पल को खोना नहीं चाहता था।
नील बस के दरवाजे तक पहुँचा और फिर पीछे मुड़ा। लड़की ने भी शायद उसकी निगाहें महसूस कीं और नज़रें ऊपर उठाईं। दोनों की आँखें मिलीं। बस कुछ सेकंड का वो खामोश संवाद, जिसमें न कोई नाम था, न कोई वादा।
नील बस में चढ़ गया और खिड़की वाली सीट पर बैठ गया। जैसे ही बस चलने लगी, उसने देखा कि वह लड़की अभी भी उसे देख रही थी और उसने धीरे से हाथ हिलाया।
बस आगे बढ़ गई, लेकिन नील के चेहरे पर एक सुकून भरी मुस्कान थी। उसे उसका नाम नहीं पता था, न ही पता कि वे फिर मिलेंगे या नहीं, पर उस बस स्टैंड की एक छोटी सी मुलाकात ने उसकी कहानी में एक खूबसूरत पन्ना जोड़ दिया था।