Hindi Quote in Thought by Irfan ayan Khan

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आज इस शहर की भीड़ और भागदौड़ को देख रहा था, तो लगा कि हम सब कितनी जल्दी में हैं। हर चेहरा किसी न किसी रेस में है, हर कदम किसी अनजानी मंज़िल की तलाश में। तभी सड़कों के इस शोर के बीच एक खामोश सा ख्याल आया कि हम दौड़ तो रहे हैं, पर पहुँचेंगे कहाँ?

इन्हीं जज्बातों को कुछ पंक्तियों में उतारा है--

हसरतें पालने में हमने पूरी उम्र गुजार दी दोस्त,
कि जब मंज़िल मिली, तो पांवों में चलने की ताकत न रही।

हम समेटते रहे दुनिया को एक मुट्ठी में बंद करने के लिए,
मगर रेत की तरह जिंदगी उंगलियों से फिसलती रही।

आज फुर्सत है तो अपनों के पास बैठकर दो पल जी लो,
कल यादें तो होंगी पास, मगर याद आने वाले नहीं होंगे।

तो दोस्तों, भागिए ज़रूर, लेकिन इतना भी तेज मत भागिए कि रास्ते के खूबसूरत मंजर और अपनों के चेहरे धुंधले पड़ जाएं।

याद रखिएगा, कामयाबी अगर अपनों के बिना मिले, तो वो हार से भी बदतर होती है।

आज ही किसी पुराने दोस्त को फोन लगाइए, घर पर मुस्कुराकर बात कीजिए, क्योंकि ये वक्त और ये लोग दोबारा नहीं मिलेंगे।

सोचिएगा ज़रूर, कि हम रिश्तों को वक्त दे रहे हैं, या सिर्फ घड़ी की सुइयों को देख रहे हैं?"
— आपका दोस्त, इरफ़ान खान

Hindi Thought by Irfan ayan Khan : 112023247
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