तुम्हारी मेरी अब वो दोस्ती वो यारी नहीं है अच्छा है किसी को इसकी जानकारी नहीं है
यूं तो तेरे बाद दिल कइयों से लगा है लेकिन वो तेरे इश्क़ जैसी किसी में बेक़रारी नहीं है
शायद उन्हीं आंसुओं का कर्ज चुका रहा हूँ वैसे तो मुझ पर किसी की भी उधारी नहीं है
कहो बादलों से जाकर उन्हें और बरसना होगा इन चार बूंदों से मेरी हिम्मत अभी हारी नहीं है
सूरत को देख उसकी सब हमदर्दी जताते है मैं वाकिफ़ हूँ उससे वो उतना भी बेचारा नहीं है
जीत कर भी उसके दर जाऊँगी उसे मालूम था क्या करूँ तन्हा रहने की मेरी तय्यारी नहीं है
मेरी बुरी आदतें उसे बर्दाश्त नहीं थी बिल्कुल उसके इंतेज़ार में वो आदतें अभी सुधारी नहीं है