*जीवन का सरल व्याकरण*
मुझे किसी से गिला नहीं, कोई शिकायत नहीं होती,
अगर ज़माने को भी मुझसे, कोई शिकायत नहीं होती।
मैं अपनी दुनिया में खुश हूँ, सलीके से रहता हूँ,
बिना वजह रिश्तों में कोई, मिलावट नहीं होती।
हँस कर काट रहा हूँ जीवन, फिर दिक्कत क्या है?
हृदय में बैर हो तो ही, रूह में थकावट होती है।
राह के काँटों को भी मैंने, मुस्कुराहट से सह लिया,
सादगी से जीने में ही, सबसे बड़ी सजावट होती है।
हौसलों के साथ अब आशीष बीच डगर खड़ा है,
जहाँ खामोशियों में भी, सुकून की आहट होती है।
न किसी से आगे निकलने की होड़ है मुझे,
न ही पीछे छूट जाने की, कोई घबराहट होती है।
*एडवी.आशीष जैन*
*7055301422*
*फिरोजाबाद*