लिखनी नयी कहानी है!
दुल्हन साथ चली मेरे ,
बंधन टूटा माया का |
माँ और बाप के साया का ,
नेह छेंह के दावा का ||
लिखनी नयी कहानी है ।
जिस आँगन में पली बढ़ी थी ,
ममता की निज डोर बंधी जो |
मिला साथ अब साजन का ,
लिखा माथ पर बंधन जो ||
लिखनी नयी कहानी है ।
मेंहदी,कंगन,झुमका बाली ,
जैसे सजी हो चंदन थाली |
सिंदूरी सा धागा का ,
झूम रही ज़्यूं धान की बाली ||
लिखनी नयी कहानी है ।
गोरी सावल या थी काली,
बनी थी घर की राज दुलारी |
गुड़िया वह मतवाली थी ,
दुख की गठरी भारी थी ||
लिखनी नयी कहानी है ।
अब तो साजन ही सब कुछ हैं,
मन के प्राण हृदय भी वह हैं |
छूट चला अब बचपन पीछे ,
गह गह भरी जवानी है ||
लिखनी नयी कहानी है ।