ख़ुद की ताक़त।
ख़ुद पे यक़ीं हो तो अँधेरे भी साथ चलते हैं,
हिम्मत की रौशनी में हालात साथ चलते हैं।
मन में अगर लगन हो, राहें स्वयं निकलतीं,
परिश्रम के बल पे सारे विचार साथ चलते हैं।
तूफ़ाँ से जो घबराए, ठहर जाए किनारे पर,
दरिया तो हौसलों से हर वार साथ चलते हैं।
अपने को जो पहचानें, सबसे बड़ी वो शक्ति,
उसी के सहारे सब नतीजे साथ चलते हैं।
गुमनाम सा वजूद भी ऊँचाइयाँ छू लेता,
भरोसे के दम पर जज़्बात साथ चलते हैं।
जग ये दर्पण सा है तेरे अपने विश्वास का,
जितना दृढ़ यक़ीं, उतने रंग साथ चलते हैं।
"प्रसंग" ये सोच जब दिल में जगह बना ले,
सपनों के संग फिर तो सच साथ चलते हैं।
- प्रसंग
प्रणयराज रणवीर