याद की कीमत
जब इंसान ने सितारों को छू लिया,
तो पहले अपनी रूह को बेच दिया।
यादों की दुकानें सजी हर गली में,
खुशी मिलती थी — पर थैली भर के।
कौन हूँ मैं, जब मेरे लम्हे किसी और के हैं?
कौन सा सच है, जब मेरे ख्वाब किराये के हैं?
स्मृति ही अस्तित्व है — यह किसने सोचा था,
जब उसे भी बाज़ार में तौला जाने लगा।
मशीनें सोचती हैं, इंसान भूलता है,
ब्रह्मांड फैलता है, पर दिल सिकुड़ता है।
तारों की रोशनी लाखों साल पुरानी है —
पर तुम्हारी एक याद से ज़्यादा पुरानी नहीं।
जो बिक गया वो तुम नहीं थे,
जो बचा — वही असली तुम हो।
यादें जाएँ, देह जाए, वक्त जाए —
पर वो जो महसूस करता है — वो कहाँ जाए?