मैंने कई जगह देखा है—चाहे कुछ घरेलू महिलाएँ हों या कम पढ़ी-लिखी महिलाएँ—
वे अक्सर उन महिलाओं को गलत समझ लेती हैं जो साफ-साफ और तर्क के साथ अपनी बात रखती हैं।
अगर कोई महिला समझदारी से, स्पष्ट शब्दों में अपनी बात कह दे,
तो उसे जल्दी ही “बहुत बोलने वाली” या “बदतमीज़” कह दिया जाता है।
जबकि सच्चाई यह है कि साफ और तर्क के साथ बात करना बदतमीज़ी नहीं, बल्कि समझदारी की निशानी है।
कई बार लोग उस बात को समझ नहीं पाते जो उनकी सोच से अलग होती है,
इसलिए वे उसे गलत नाम दे देते हैं।
लेकिन सच यही है कि
ज्ञान और समझ रखने वाला व्यक्ति अपनी बात स्पष्ट कहता है,
और जो सुनने की आदत नहीं रखते, उन्हें वही बात बुरी लगती है।
- archana