पति ने मुझे प्रमोशन पार्टी में नौकरानी बनाकर अपमानित किया… उसे क्या पता था कि उसी कंपनी की असली मालिक मैं हूँ!
महँगी शराब की तीखी खुशबू, आयातित इत्र की महक, और झूमरों की सुनहरी रोशनी से नहाया हुआ वह ग्रैंड बॉलरूम—हर चीज़ चीख-चीखकर बता रही थी कि आज रात किसी बहुत “खास” इंसान की है। दीवारों पर सजे क्रिस्टल ऐसे चमक रहे थे जैसे सितारे ज़मीन पर उतर आए हों। लाइव बैंड धीमी धुन बजा रहा था, और मेहमानों के हाथों में शैंपेन के गिलास जगमगा रहे थे।
यह रात थी राहुल की।
उसे अभी-अभी देश की प्रतिष्ठित कंपनी Apex Global Holdings में वाइस प्रेसिडेंट के पद पर प्रमोशन मिला था। बिज़नेस सर्कल में यह किसी ताजपोशी से कम नहीं था। उसके सहकर्मी, सीनियर मैनेजर्स, डायरेक्टर्स—सब उसे बधाई देने आए थे। हर कोई उसके कंधे थपथपा रहा था, जैसे उसने दुनिया जीत ली हो।
और मैं?
मैं उसी बॉलरूम के एक कोने में खड़ी थी… काली-सफेद मेड की वर्दी पहने।
मेरे हाथ में शैंपेन की ट्रे थी। एप्रन के कोने पर सॉस का दाग लगा था। पैरों में सस्ते जूते थे, जिनमें हील भी ठीक से नहीं थी। कोई मुझे देखकर अंदाज़ा भी नहीं लगा सकता था कि मैं इस पार्टी से जुड़ी हूँ—सिवाय एक बात के।
मैं उसकी पत्नी हूँ।
पाँच साल से।
सुबह जब राहुल ने वह वर्दी मेरे हाथ में थमाई थी, उसकी आवाज़ में बनावटी नरमी थी।
“डियर, कैटरिंग स्टाफ कम पड़ गया है। बस आज रात के लिए मदद कर दो। मेरे बॉस बहुत स्ट्रिक्ट हैं। मैं इम्प्रेस करना चाहता हूँ। हमारे फ्यूचर के लिए है।”
हमारे फ्यूचर के लिए।
ये शब्द मैं पहले भी सुन चुकी थी। हर बार जब उसने मुझे अपने दोस्तों से “इंट्रोड्यूस” नहीं किया। हर बार जब उसने कहा, “तुम्हें इन हाई-प्रोफाइल पार्टियों में कम्फर्टेबल नहीं लगेगा।” हर बार जब उसने मेरे कपड़ों, मेरे बोलने के तरीके, मेरे साधारण परिवार का मज़ाक उड़ाया।
लेकिन मैंने हमेशा समझौता किया।
क्योंकि मैं उसे प्यार करती थी।
या शायद मैं उस इंसान को प्यार करती थी, जो मुझे लगा था कि वह है।
पार्टी शुरू हुई। मेहमानों की हँसी, ग्लासों की टकराहट, फ्लैशिंग कैमरे—सब कुछ परफेक्ट था। मैं ट्रे लेकर इधर-उधर घूम रही थी। कई लोगों ने मुझे ऐसे देखा जैसे मैं हवा हूँ। कुछ ने आदेश देने के अंदाज़ में उँगलियाँ चटकाईं।
“ए, शैंपेन।”
“यहाँ नैपकिन गिर गया है।”
“जल्दी करो।”
मैंने सिर झुकाकर सब किया।
फिर अचानक, बॉलरूम के बड़े दरवाज़े खुले।
सभी की नज़र उधर घूमी। और वहाँ… राहुल खड़ा था।
डार्क ब्लू टेलर्ड सूट में, बाल पीछे सेट किए हुए, चेहरे पर विजेता की मुस्कान। लेकिन वह अकेला नहीं था।
उसकी बाँह में हाथ डाले खड़ी थी एक औरत—लाल गाउन में, आत्मविश्वास से भरी, कैमरों की फ्लैश को एन्जॉय करती हुई। उसकी चाल में अधिकार था, उसकी मुस्कान में दावा।
प्रिया।
वह नाम जो मेरे मन में कई महीनों से ज़हर की तरह घुल रहा था। वह “कोलीग” जिसके साथ देर रात तक मीटिंग्स होती थीं। वह “प्रोजेक्ट पार्टनर” जिसके मैसेज आते ही राहुल का चेहरा बदल जाता था।
राहुल ने माइक उठाया।
“लेडीज़ एंड जेंटलमैन!” उसकी आवाज़ पूरे हॉल में गूँजी। “आज की रात सिर्फ प्रमोशन की नहीं है… मैं आपको अपनी सफलता की असली वजह से मिलवाना चाहता हूँ। मेरी इंस्पिरेशन। मेरी म्यूज़… प्रिया।”
तालियाँ गूँज उठीं।
मेरे कानों में शोर धुँधला पड़ गया।
मैंने ट्रे कसकर पकड़ी। साँस भीतर ही अटक गई। वह मुझे देख भी नहीं रहा था। जैसे मैं अस्तित्व में ही नहीं हूँ।
कुछ ही देर में वे दोनों मेहमानों के बीच से होते हुए मेरे सामने आ खड़े हुए। प्रिया ने मुझे सिर से पाँव तक देखा—एक तिरछी मुस्कान के साथ। उसने ट्रे से शैंपेन उठाई।
और “गलती से” आधी शैंपेन मेरे जूतों पर गिरा दी।
“ओह, सॉरी!” उसने नकली अफसोस जताया। “ट्रे ठीक से पकड़ा करो ना। साफ़ करो, कहीं राहुल फिसल न जाएँ।”
पास खड़े कुछ लोगों की हल्की हँसी मेरे कानों में चुभ गई।
राहुल ने बस इतना कहा, “छोड़ो ना बेबी, ये स्टाफ ऐसे ही होते हैं।”
स्टाफ।
मेरे अंदर कुछ टूट रहा था। लेकिन मैं झुकी रही।
“सॉरी, मैम,” मैंने धीमी आवाज़ में कहा।
और तभी—अचानक—संगीत धीमा पड़ गया।
हॉल में सन्नाटा छा गया।
किसी ने फुसफुसाया, “चेयरमैन आ गए…”
देश की बिज़नेस दुनिया का सबसे प्रभावशाली नाम। Vikram Sharma। वह शख्स जिसकी एक नज़र से लोगों के करियर बनते और बिगड़ते हैं।
राहुल तुरंत सीधा होकर उनकी ओर बढ़ा। उसके चेहरे पर चापलूसी की चमक लौट आई।
लेकिन चेयरमैन की नज़र… कहीं और टिकी थी।
सीधे… मेरी ओर।
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