स्वलिखित रचना-
" खामोश कमरा"
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खामोश कमरा
बहोत कुछ कहेगा ।
इस कमरे मे अगर
कोई है, बात करो,
नही है,
तो एक काम करो ।
कमरे मे जो तन्हाई है,
रंगहीन दिवारे है
उनकी खामोशी सुनो ।
वो अनकही कहानी,
सूनने का धैर्य रखो..
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स्वलिखित रचना- खामोश कमरा
कवी अरुण वि.देशपांडे-पुणे
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