“एक बार कहो”
हवा में घुल जाए नाम तेरा, धड़कन की आवाज़ मेरी हो,
चाँदनी भी झुककर देखे अब, हर रौशनी वो भी मेरी हो।
दूर रहकर भी पास महसूस करु, हर चाहत भी मेरी हो,
हर दर्द, हर आँसू भुलाकर, ज़िंदगी की राह भी मेरी हो।
आँखों की बारिश में भीग कर, हर राज़ खोल ही दिए हैं,
चुप्पिया तह में छुपाकर, सच ही सब जुबां बोले मेरी हो।
रात की तन्हाई में गूँज उठे, हर गीत जो गाए वो मेरी हो,
सितारों की रौशनी में चमक, हर दमक दिखे वह मेरी हो।
सपनों की गलियों में बस जाए, हर वो परछाई मेरी हो,
हर ख्वाब, हर उम्मीद सजाकर, जीवनरंग सब मेरी हो।
वक्त की हर लकीर मिटाकर, हर फासला दबा दे मेरा,
यादों की वो गलियों में घुलकर, हर छवि जो मेरी हो।
दिल की किताब खुलकर पढ़ो, हर पन्ना बोले मेरी हो,
ख्वाबों की दुनिया सजाकर, हर शब्द कहे तुम मेरी हो।
एक बार कहो वादा सच्चा, जीवनभर निभाएंगे रिश्ता,
प्रेम की राह में ही 'प्रसंग' चलेंगे, हर कदम तुम मेरी हो।
प्रसंग
प्रणयराज रणवीर