“भूल जाया करो”
यूँ हर बात दिल पे सजा लिया करो,
कुछ बातों को बस भूल जाया करो।
हर रोज़ जो टूटे ख़्वाबों का शहर,
उन खंडहरों से नज़र हटाया करो।
जो लोग तुम्हें बोझ समझने लगें,
उन राहों से ख़ुद को बचाया करो।
नफ़रत के साए बहुत घने हैं यहाँ,
मोहब्बत को सीने में छुपाया करो।
हर एक सवाल का जवाब ज़रूरी नहीं,
कुछ ख़ामोशियों को निभाया करो।
जो ज़ख़्म मुक़द्दर ने दिए हैं गहरे,
उन्हें सब्र से दिल में सुलाया करो।
प्रसंग, जो बीत गया लौटेगा नहीं,
उस बीते लम्हे को भूल जाया करो।
"प्रसंग"
प्रणयराज रणवीर