बोलना ज़रूरी है
बोलना ज़रूरी है,
क्योंकि जब आप बोलते हैं,
तो सिर्फ आप नहीं बोलते—
आपके साथ आपके संस्कार बोलते हैं।
आपकी परवरिश बोलती है,
घर का वातावरण बोलता है,
माँ-बाप की सीख
आपके हर शब्द में ढलकर बोलती है।
आवाज़ तो बस माध्यम है,
असल में चरित्र बोलता है,
लहजा बता देता है
कि भीतर कितना आदर पलता है।
इसलिए बोलो—
पर ऐसे कि शब्दों में शिष्टता हो,
बातों में सादगी हो,
और हर वाक्य में इंसानियत की गरिमा हो।