कभी कविता कभी शायरी,
कभी गीत,कभी गज़ल हो तुम,
मेरी कल्पनाओं की रचना हो तुम।
कभी ख़्याब,कभी ख्याल,
कभी लहज़ा कभी मिज़ाज हो तुम,
मेरे हर जज़्बात का जज़्बा हो तुम।
कभी नज़ाकत कभी शरारत,
कभी शराफ़त कभी शिकायत हो तुम,
मेरी हर वज़ह की वज़ह हो तुम।
कभी रुखसत कभी रूबरू,
कभी ख़फा, कभी गुफ़्तगू हो तुम,
मेरे हर हाल की रौनक हो तुम.....
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