दुख तो सब आ चुके हैं
सुख की उम्मीद जगी हुई है,
दुनिया अपनी जगह घूमती
घाम की आदत बनी हुई है।
प्यार से अच्छा क्या होगा
प्यार से सच्चा क्या होगा!
श्रीकृष्ण अच्छे हैं
राधा भी अच्छी हैं।
उनका सुख दुख समान करना
मुझे नहीं आता है,
जय-पराजय ,लाभ-हानि
समान मानना कठिन कठोर है।
दुख तो सब आ चुके हैं
सुख की उम्मीद जगी हुई है।
*** महैश रौतेला