बहुत अलग सा है मेरे इश्क़ का हाल,
उसकी ख़ामोशी मेरे लाखों सवाल।
कभी सुकून सा तो कभी दिल में उठे तूफ़ान सा है,
मेरी ज़िंदगी में वो ख़ुशियों के रंगों सा है।
बेरंग है मेरी ये दुनिया उसके बगैर,
क्या मैं ज़िंदा भी रह पाऊँगा कभी उसके बगैर?
हज़ारों सितम वो मेरे दिल पर ढाए,
फिर भी ये दिल उसे ही बुलाए।
यूँ तो शिक़ायतों की पाई-पाई जोड़ रखी है मैंने,
पर वो गले लगा ले तो सारा हिसाब बिगड़ जाए।
फिर से जो देख ले मुझे वो उन नज़रों से,
तो ये दिल सारे सितम भूल जाए।
कुछ ऐसा ही होता है इश्क़ का हाल,
तबाही होकर भी तबाही नहीं दिखती...
ये इश्क़ है जनाब, इसकी दवा नहीं मिलती।
#हिमांशु