“एक रात की दास्तां”
शब भर खनकती रही चूड़ियाँ कलाई की,
रक़्स में ढलती गई हर अदा अंगड़ाई की।
चाँद का करम भी कुछ इस कद्र बरसता रहा,
सिलवटों में उतरती रही इनायत रोशनाई की।
सुबह हुई तो फैल गई हर बात शनासाई की,
निशां-ए-उल्फत ने बयां की गुस्ताखियाँ हरजाई की।
Kirti Kashyap"एक शायरा"✍️
रक़्स = नृत्य, नाच
शनासाई = पहचान, जान-पहचान
निशां-ए-उल्फत = मोहब्बत की निशानी