"बिंदु"
वह जगह सुनसान थी—अपने आप में बिल्कुल इकलौती। वहाँ रुकने का कोई कारण नहीं था, फिर भी वह ठहर गया। पास ही एक पुराना इमली का पेड़ खड़ा था। उसके आसपास न कोई जानवर था, न कोई पक्षी। हवा तक स्थिर लग रही थी। कहीं से कोई आवाज़ नहीं आ रही थी। पूरा इलाका ऐसे जड़ हो गया था, मानो सन्नाटा ही वहाँ की एकमात्र मौजूदगी हो।
कोई सड़क पर चलते हुए धीरे से तस्वीर में आ रहा था
वह वह किसी बिंदु की तरह अस्पष्ट दिखाई दे रहा था
दिखाई दे रहा था
पर किसे?
वहां देखने वाला कोई मौजूद था ही नहीं।
वह बिंदु बड़ा होता गया
बड़ा और भी बड़ा
दिखने से तो वह इंसान ही लग रहा था
अगर कोई ठीक से देखता तो
अगर वहां के वातावरण में देखने के लिए कोई मौजूद होता तो
उसे दिखता की एक बेबस लाचार इंसान धूप में चलता हुआ खाली सड़क पर फटे हाल बिना चप्पल के चल रहा है
लेकिन क्या कोई इंसान बीस फिट ऊंचा होता है?