#5. हमको आदत लग चुकी हैं महफ़िलों की अब अकेले रहने में घुटन होता हैं,
अकिं करो मैं वही हूँ जो बरसों गुजारा हैं अकेले बंद कमरे में,
और आज अंधेरे से भी मुझे चुभन होता हैं, इसमें उसकी क्या गलती हैं ..?
ये तो वक्त का एक चलन होता हैं, कि अपने दिल पर मेरा नाम लिखने वाली उस लड़की को आज मेरे नाम से भी जलन होता हैं।
:- रौशन कुमार केसरी
05.12.2025