#2. एक वक्त था जब मेरे हाथों मे तेरा हाथ था, मेरे नजरों मे तेरे सपनों की एक औकात था, मेरा औरों से भी बातचित में तेरा एक बात था,
और आज तन्हाई में अकेला खड़ा ना मेरे हाथों मे तेरा हाथ हैं, ना मेरे नजरों में तेरे सपनों की कोई औकात हैं, ना हीं मेरे बातों में तेरा कोई बात हैं,
हाँ अगर कुछ है तो मेरे मन में हर रोज उमड़ते हजारों सवाल हैं, इस शहर में चारों तरफ फैला मेरा हजारों काल (उसके आशिक़) है, मैंने जो की थी तुमसे मोहब्बत वो आज एक मिसाल हैं,
आखिर क्यु तुम्हें मेरे जज्बातों की कदर नहीं, तेरे दिल में मेरे लिए सबर नहीं, तुम्हें मेरे प्यार पर फ़कर नहीं, तेरे बातचित में मेरा जिकर नहीं, आखि़र क्या हैं इन सवालों का जवाब?
तेरा वो शाम को रूठ जाना या सुबह की बहानेबाज़ी या दिन का मेरा खुली आँखों का ख्वाब, बता मेरे इन सवालों का क्या हैं जवाब....?
:- रौशन कुमार केसरी
01.11.2025