शब्दों की लड़
जब लड़ लड़
की आवाज़ के
साथ तड तदाती
है बड़े तूफ़ान खड़े
हो जाते है आपस
मे लड़ते लड़ रुपी
पटाखे बड़ी आवाज़ से
कानो में तड तडातेहै
शब्दों की फटन
से कान भी फट
जाते है पर जब
यही शब्द जब
फुलझड़ी की तरह
चमकते है तो
खुशनुमा इस फिजा
मे झिलमिलाते है
जय जिनेन्द्र
आशीष जैन (श्रीचंद)