बेटी पापा से बोली
शाम को घर आ के
मुझे कहीं घुमाने ले
चलो ना पापा
झुला झुलना है
गोद में लेके झुलाओ
न पापा थक गयी हूँ
कंधे पर बिठा लो
न पापा डर लग रहा
अँधेरे में सीने से
लगाओ न पापा
मम्मी तो थक के
सो गयी आप ही
लोरी सुना के सुलाओ
न पापा
स्कूल पूरी हो गी
अब दादी कॉलेज नहीं
जाने दे रही कॉलेज
जाने दो न पापा
कॉलेज जाने दो
न पापा
कॉलेज में गलती
हो गी माफ़ी दे दो
ना पापा
छोटी सी भूल की इत्ती
बड़ी सजा दी डोली
में ही बिठा दिया पापा
तो आप आंसूं न बहाओ
पापा आप की मुस्कराहट
अच्छी लगती है पापा
एक बार मुस्कुराओ तो पापा
मेने आपकी हर बात मानी
आप भी एक मेरी बात मान
जाओ तो पापा प्लीज पापा
मान जाओ तो पापा
में नहीं धरा पर बोझ पापा
प्लीज पापा बेटी बचाओ पापा
बेटी बचाओ पापा
जय जिनेन्द्र
(बेटी बचाओ पापा)
आशीष जैन