मोहब्बत
मोहब्बत सच में होती है, इसमें कोई झूठ नहीं,
झूठ तब पैदा होता है, जब उम्मीदों का कद सच से ऊँचा हो जाए।
न मिली तो उसे धोखा कह देना आसान है,
पर हर अधूरी कहानी में बेईमानी ज़रूरी नहीं होती।
कुछ लोग दिल से मोहब्बत करते हैं,
और जब मुक़द्दर साथ न दे,
तो अपने नसीब की हार को
दूसरे की नीयत का गुनाह बना देते हैं।
मोहब्बत का न मिलना विफलता हो सकता है,
पर हर विफलता धोखा नहीं होती,
कभी-कभी दो सच्चे रास्ते
बस एक ही मोड़ पर खत्म हो जाते हैं।
आज के वक़्त में मोहब्बत से पहले
दिल नहीं, दिमाग़ का पका होना ज़रूरी है,
इतना ज्ञानी कि
चंद मुलाक़ातों में इंसान को पढ़ सको।
बातों के मिठास में छुपे ज़हर को पहचान सको,
नज़रों की सच्चाई और आदतों की चालाकी को
अलग-अलग देख सको।
क्योंकि आज मोहब्बत अंधी नहीं,
लोग नक़ाब पहन कर प्यार करते हैं,
और गिरने के बाद होश आने से बेहतर है
चलने से पहले रास्ता पहचान लेना।
इसलिए मोहब्बत करो,
पर आँखें खोल कर,
दिल दो, पर पहले इंसान को समझ कर,
ताकि न मोहब्बत बदनाम हो
और न हर अधूरी कहानी को
धोखे का नाम देना पड़े।