गवाही
अगर आँखों की गवाही सच की राह दिखाती है,
तो खामोशी भी कई बार इक सच्ची ज़बानी होती है।
लफ़्ज़ मुकर जाएँ तो क्या, एहसास कहाँ मुकरते हैं,
दिल की हर एक धड़कन अपनी ही कहानी होती है।
मोहब्बत में तबाही को तुम सच कह गए हो लेकिन,
कभी-कभी इसी राख से ही नई ज़िंदगानी होती है।
किताबों से जो न समझ आए, वो तजुर्बे सिखा देते हैं,
ज़िंदगी की पाठशाला बड़ी पुरानी होती है।
हया की ओट में लिपटी गुनाही सच सही मगर,
कभी उसी पर्देदारी में इज़्ज़त की निशानी होती है।
सुकूँ लफ़्ज़ों में उतरे ये भी तो मुमकिन नहीं,
जो साथ गुज़र जाए बस वही असल रवानी होती है।
आर्यमौलिक