चकवा
राजेश ने बूढ़े पीपल के वृक्ष को घूर कर देखा फिर सहज ही पीछे की तरफ देखा
एक खुशहाल परिवार पीछे बैठा था।
राजेश अपने बहन को ससुराल से मायके ला रहा था। कार में उसके जीजा जी और बहन पीछे बैठे थे उनकी 8साल की बेटी उनके बिच में सो रही थी।
रात का वक्त सुनसान रास्ता राजेश ड्राइविंग कर रहा था। रास्ते के दोनों तरफा पेड़ थे, खेत थे। आसमान साफ था – हजारों चांदनियों के बीच चांद बादलों को ओढ़ते हुए झपकी ले रहा था।
वह रात पूर्णिमा की थी। राजेश को ये रास्ता पता था। हमेशा का था। और वह कोई नया तो ड्राइविंग नहीं कर रहा था।
अब एक होटल दिखने वाला था लेफ्ट साइड – होटल से पहले पीपल का पुराना बूढ़ा वृक्ष।
उसने टेप लगा दिया नवनाथ भजन कीर्तन चल पड़ा
लेकिन तभी ऊपर लटका ये हुए गेरूए कलर के हनुमान जी पता नहीं कैसे नीचे गिर पड़े
उन्हें उठाकर वापस रखने के लिए राजेश पलभर के लिए नीचे झुका गाडी बंद कर दी थी उसने
उसने उठा लिया और फिर हनुमान जी को ऊपर लटकाने लगा
लेकिन तभी गाडी के छत पर धड़ाम!
कोई पेड़ से कूदा था
उस आवाज से उसकी आठ साल की भतीजी नीद से उठ गई
"क्या है वो..." उसके जीजा बोल पड़े दिख रहा था कि उनकी आवाज सहमी सी थी
कोई भी डर जाए अगर रात को सुनसान सड़क पर बंद गाड़ी के छत पर अगर कोई धाड़ धाड़ चल रहा हो
राजेश दरवाजा खोलने वाला था
"नहीं राज मत खोल… जल्दी चल यहां से!" उसकी बहन खिड़की के कांच की तरफ देखते हुए बोल पड़ी।
राजेश ने गाड़ी स्टार्ट की वह जितनी हो सकती थी गाड़ी भगा रहा था
लेकिन उसे अहसास हो रहा था कि वह गाडी नहीं चला रहा है बल्कि…
उसने सोचना छोड़ दिया
न जाने कितनी देर तक गाड़ी भाग रही थी लेकिन लेफ्ट टर्न है कि आ ही नहीं रहा था
वह होटल कही भी दिख नहीं रही थी और टेप भी अटका हुआ गिछिड मिचीड आवाजें निकाल रहा था।
गाड़ी भाग रही थी
भाग रही थी
भाग रही थी
"राजेश मामा दरवाजा खोलो!!!" उसकी भांजी जोर से चिल्लाई
जैसे एकदम से किसी ने पानी मारा हो ऐसा अहसास राजेश के तन बदन में बिखर गया उसके रोए खड़े हो गए जब उसने पीछे मुड़कर देखा
उसकी आठ साल की भतीजी अपने टेडी को गले से लगाकर खिड़की के कांच की तरफ डरी हुईं देख रही थी
राजेश की आंखे भय से बड़ी हो गई क्योंकि… उसकी बहन या जीजा कही भी दिख नहीं रहे थे
"चलती हुई गाड़ी में… कैसे" राजेश खुद से ही बड़बड़ाया
"मामा… मम्मी, पापा" बच्ची ने खिडकी की तरफ इशारा किया
राजेश के ध्यान में आया कि गाड़ी तो चल ही नहीं रही है मतलब इतनी देर से गाड़ी भाग नहीं रही थी अपनी जगह पर ही जस की तस खड़ी थी
मीटर जैसा था वैसा ही था थोड़ा भी आगे नहीं बढ़ा था
और तब जाकर राजेश को याद आया की दो साल पहले ठीक इसी जगह पर पुराने बूढ़े पीपल वृक्ष से टकराकर उसकी बहन और जीजा एक्सीडेंट में मर गए थे
तब भांजी बच गई थी
उसके बहन की मौत कांच की खिड़की से बाहर निकलते वक्त हुई थी और जीजा के सिर में सामने के कांच घुस गए थे
लोग कहते की जीजा को पीपल के चकवा ने बहका दिया था इसीलिए वे भटक गए थे
और उनकी मृत्यु हो गई दो साल पहले
मतलब अगर आज…
वे दोनों मृत न होते तो राजेश का यहां से बचाना लगभग नामुमकिन था
उसकी बहन और जीजा ने उसके साथ अपनी आठ साल की बेटी को भी बचा लिया था
जब गाड़ी चलाते हुए राजेश ने बूढ़े पीपल वृक्ष को घूर कर देखा था तभी पेड़ की डंडाल पर बैठा कोई उसे ही देख रहा था
ये इसी पीपल का चकवा था जिसने दो साल पहले उसके जीजा बहन की बलि ली थी
पर अब राजेश खतरे से बाहर था क्योंकि टेप पर नवनाथ भजन कीर्तन फिर से चालू हो गया