उन्मुक्त पंछी
उन्मुक्त पंछी वह नहीं, जो केवल आकाश में उड़ता है,
उन्मुक्त वही है, जो बंधन की कल्पना से भी मुक्त होता है।
जिसकी दृष्टि अवरोधों पर नहीं, शिखरों पर टिकी रहती है,
जिसकी चेतना भय की छाया को तिरस्कृत कर देती है।
आँधियाँ उसके पंखों को थकाने आती हैं,
पर वह उन्हें साधकर अपनी दिशा रच लेता है।
प्रहार उसे विचलित नहीं करते,
वे तो उसके संकल्प को और कठोर बनाते हैं।
वह गिरता है, टूटता है, फिर भी उठ खड़ा होता है,
क्योंकि उसकी आत्मा समझौते की भाषा नहीं जानती।
न पिंजरे की सुविधा उसे लुभाती है,
न सुरक्षित नीड़ उसे रोक पाता है।
उसकी उड़ान प्रश्नों से नहीं, उत्तरों से जन्म लेती है,
और उसका लक्ष्य क्षितिज नहीं—शिखर होता है।
जो हर बाधा को लाँघकर भी अपनी पहचान न खोए,
वही उन्मुक्त पंछी स्वतंत्रता का जीवंत घोष है।