उन्मुक्त पंछी वह है, जो बंधन-भ्रम का त्याग कर देता है,
अपनी चेतना से भय और विघ्नों को लाँघ आगे बढ़ जाता है।
आघातों की ज्वाला में तपकर भी जिसकी उड़ान अक्षुण्ण है,
वह प्रत्येक अवरोध को तिरस्कृत कर शिखराभिमुख है।
जिसका संकल्प ही आकाश हो,
उसकी स्वच्छंद उड़ान ही उसकी पहचान है।
उषा जरवाल ‘एक उन्मुक्त पंछी’