ख्वाब तो बहुत देखे लेकिन सोचा ही नहीं ...
उन ख्वाबों का क्या करोगे ...
जब उन्हें देखने के लिए आँखें ही ना रहें!
चाहत बहुत कुछ पाने की थी..
लेकिन सोचा ही नहीं
जब हम ही ना रहें तो उन चाहतों का क्या होगा?
जब मौत के करीब खुद को पाया,
तब समझ आया कि सब ख्वाब, चाहत, शिद्दत तो सिर्फ एक हवा का झोंका था... एक पल में सब कुछ उड़ा ले गया । बस रह गया तो एक हाड़ मांस का बेजान पुतला ।