सत्य या छलावा❣️🌸
ना जाऊँ मैं पापों को मेरे
ना जानूँ कर्म हजार
शिव मेरी आत्मा पीड़ित है
मैं इतना गोरखधंधे में खो गई कि अपने गोरक्ष से दूर जा बैठी
अब उन बिन कुछ अच्छा ना लग रहा है, जाने मौत आ गई हो
नहीं, मौत तो हजार गुना अच्छी है इस गुरु की जुदाई से
ये तपती आत्मा चैन न पा रही है
ना आगे बढ़ रही है, ना ठहर पा रही है बस
परिस्थितियों में उलझी ये ठोकरें ही खा रही है
ना उसे कोई ग़म खा पा रहा है, ना उसे कोई खुशी निखार पा रही है
बस पागल हो कर एक सच हो या छलावा, उसने सत्य मान बैठी है कि गोरक्ष उसमें है और उनके भीतर बसी
वो इसलिए हो रही है विफल खोजने में गुरु को
क्योंकि जो अंतर में बैठे हैं उन्हें बाहर नहीं पाया जाता
By : गोरक्षचेली
ॐ शिव गोरक्ष ❣️🙏🌸