किसी की ताकत बनो मजबूरी नहीं
कभी किसी की ताकत बनो,
मजबूरी नहीं,
ज़िंदगी में किसी के लिए सहारा बनो,
बोझ नहीं।
क्योंकि जब इंसान टूटता है,
तो उसे सहारे की ज़रूरत होती है,
तरस की नहीं।
वो चाहता है साथ,
ना कि किसी की झूठी हमदर्दी।
जब कोई गिरता है,
तो हाथ बढ़ाना अच्छा लगता है,
पर वो हाथ उम्मीद का होना चाहिए,
अहम का नहीं।
किसी की मदद करो तो ऐसे,
जैसे उसके सपनों का हिस्सा बन रहे हो,
ना कि उसकी कमजोरी का कारण।
कभी किसी की आँखों में दर्द देखो,
तो उसमें अपना चेहरा ढूंढो,
शायद किसी दिन तुम्हें भी
ऐसे ही किसी ने देखा होगा —
और कुछ नहीं कहा होगा।
वो चुप्पी ही सिखा देती है,
कि हमदर्दी से बड़ा कोई धोखा नहीं,
अगर उसमें स्वार्थ छिपा हो।
इसलिए ताकत बनो —
क्योंकि ताकत वो नहीं जो ऊँचा दिखती है,
वो है जो झुककर किसी टूटे को जोड़ती है।
जो आँसू पोंछती है,
पर कभी एहसान नहीं जताती।
जो किसी की मुस्कान बनती है,
बिना अपनी पहचान मांगें।
कभी किसी की कहानी में
हीरो बनना जरूरी नहीं,
बस इतना करो कि
वो जब तुम्हारा नाम ले,
तो उसके लफ्ज़ों में
सम्मान और कृतज्ञता हो।
कभी किसी के घाव पर मरहम लगाओ,
तो ये मत सोचो कि तुमने कुछ बड़ा किया,
शायद वो तुम्हारी वजह से
फिर से जीना सीख जाए —
बस वही सबसे बड़ा इनाम है।
ज़िंदगी का असली सौंदर्य
देने में है,
न कि दिखाने में।
आजकल लोग मदद करते हैं
तो तस्वीरें पोस्ट करते हैं,
पर सच्चे इंसान वो हैं,
जो किसी की रात में रोशनी जलाते हैं
और फिर खुद अंधेरे में गुम हो जाते हैं।
कभी किसी की ताकत बनो,
क्योंकि ताकत वो नहीं
जो किसी को दबा दे,
बल्कि वो जो किसी को
उठा दे।
कभी किसी के दर्द में शामिल हो जाओ,
पर उसके दर्द को
अपनी पहचान मत बना लो।
कभी किसी को प्यार दो,
पर उसे कैद मत करो।
कभी किसी को हौंसला दो,
पर उसे निर्भर मत बना दो।
जब कोई गिरता है,
तो वो अकेला नहीं गिरता,
उसके साथ गिरता है उसका आत्मविश्वास,
उसका विश्वास,
उसका आत्मसम्मान।
अगर तुम सच में मददगार हो,
तो पहले उसका विश्वास लौटाओ,
क्योंकि विश्वास लौटाने वाला
भगवान के बराबर होता है।
मजबूरी बनना आसान है,
लोगों को अपने बिना अधूरा महसूस कराना,
ये कोई बड़ी बात नहीं।
बड़ी बात है,
किसी के जीवन में आकर
उसे इतना सक्षम बना देना
कि वो तुम्हारे बिना भी
मुस्कुरा सके।
कभी किसी को सहारा दो,
तो ये सोचकर दो
कि वो कल खुद भी
किसी का सहारा बने।
यही जीवन का सच्चा चक्र है।
एक दिन जो तुम्हारी मदद करेगा,
वो किसी और के लिए प्रेरणा बनेगा।
और तब तुम्हारी अच्छाई
सिर्फ एक काम नहीं,
एक संस्कार बन जाएगी।
ये कविता थोड़ा बड़ा है इसलिए दो पार्ट में आएगा।