Hindi Quote in Poem by Anup Gajare

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२…“बारिश में भीग रहा था समुद्र”
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बारिश में भीग रहा था समुद्र —
जैसे पहली बार उसे एहसास हुआ हो
कि जल भी जल से घायल हो सकता है।

उफ़क तक फैल गया था उफान,
नाव अकेली,
थक चुकी थी सागर का हाथ थामते-थामते।
उसके भीतर डूबती हुई कोई प्रार्थना थी,
जिसे किनारा कभी सुन नहीं सका।

साथ छूट गए —
वे जो लहरों की तरह पास थे,
अब केवल स्मृति के फेन में बचे हैं।
अपने — लुटे गए,
पराए तो पहले ही काफ़िर थे,
बस एक वही था जो हर ज्वार में
खुद से लिपटता रहा।

फिर हुई बारिश —
इतनी कि सागर खुद अपने भीतर
डूबने लगा।
इतनी कि बादल भूल गए,
कितना जल वापस देना था,
और कितना बस गिराना।

वो पी सकता था सब —
दुख, नमक, शोर, स्मृतियाँ,
पर बर्दाश्त नहीं कर सका
अपने ही विस्तार की सज़ा।

और एक दिन —
भीग गया समुद्र,
उफनती बारिश में।

अब बारिश थी,
पर समुद्र नहीं था —
बस एक विशाल मौन,
जिसमें लहरों की जगह
आवाज़ें डूब चुकी थीं।

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Hindi Poem by Anup Gajare : 112003001
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