"टूटा दिल, मगर टूटा नहीं हूँ मैं"
आज दिल टूटा है, हां — ये सच है,
पर इस टूटन में भी कोई दर्द अधूरा नहीं।
हर आँसू, हर टीस ने कुछ सिखाया है,
और ये भी सच्चाई है कि मैं अब कमजोर नहीं।
नियति ने जो लिखा, वो भुगता मैंने,
ना शिकवा है उसे, ना शिकायत खुदा से।
कभी हँसते चेहरे पर भी थे बादल घने,
पर रोशनी मिली भीतर के उजाले से।
हर बिछड़न ने मुझे जोड़ना सिखाया,
हर खालीपन में उम्मीदों ने आशियाँ बनाया।
जो गया, शायद वो मेरा था ही नहीं,
जो आएगा, वो मेरी रूह से जुड़ा होगा कहीं।
किस्मत की किताब में जो लिखा था, वो हुआ,
पर मेरी हिम्मत ने हर पन्ने पर दस्तखत किया।
मैं गिरा ज़रूर, मगर रुका नहीं,
हर दर्द के बाद मैंने खुद को फिर से जिया।
इसलिए आज दिल टूटा है — पर निराश नहीं,
मैं खुद अपनी रोशनी हूँ, मुझे सूरज की प्यास नहीं।
कल फिर ख्वाब होंगे, नए सफ़र की शुरुआत,
क्योंकि ज़िन्दगी रुकती नहीं, बस बदलती है बात।