चाहत है सुख का,सुंदर भविष्य का।
समझ नादान मनुष्य,चाहत का पल यही है।
बीता कल का भविष्य आज ही है।
चाहत रहेगा सुख का,सुंदर आने वाला पल का।
बन समझदार मनुष्य,यह ही वह पल है।
वह सुंदर दिन का।
चाहत को बदल हकीकत में,हकीकत बना इस पल को।
आज ही है वह पल, ढूंढ बहाना सुंदर जीवन आज ही जीनेको।
चाहत का बाढ़ न होगा कम,न कम होगी आशा सुंदर भविष्य का।
न जिया कर कल्पना को,आज ही वो दिन है।
जो तूने आशा किया था सुंदर भविष्य का।
मन में ही है,चाहत सुख का।
मन में ही है आशा सुंदर भविष्य का।
समझना है नादान।
मन में ही है सुख,मन से ही है सुंदर भविष्य।।
ढूंढना है तो खोज, सुख इस पल में।
बहाना हजार, बिखरे पड़े तेरे खुद में।
खोज निकाल नादान सुख बिखरे पड़े है,
सुंदर भविष्य हजार।