क्या?...."कुछ नहीं"
मेरी रूखी सूखी दुनियां में बहार ले आया था वो,
मेरी बंजर सी जिंदगी में बदलाव लाया था वो,
पर अब से किसी और का होने वाला था वो,
मैं उसे मन ही मन रोक रही थी,
तभी उसने पूछा... "क्या?"
मैंने कहा - "कुछ नहीं!"
झूठों के ज़माने में एक सच्चा इंसान मिला था,
पर शायद वो हमेशा से किसी और का था,
झूठ तो मेरे दिल ने मुझसे कहा था,
जो मेरा था ही नहीं उसे अपना समझ बैठा था,
मैं चीख कर उसका नाम ले रही थी मन में,
और उसने पूछा... "क्या?"
मैंने बोला - "कुछ नहीं!"
मैं भावनाओं का समंदर लिए उसे देख रही थी,
अपने प्यार को अपने ही आंखों के सामने किसी और का होते देख रही थी,
आखिरी बार उसका नाम मन ही मन ले रही थी,
तभी उसने पूछा... "क्या?"
मैंने भी कह दिया - "कुछ नहीं!"
वो आखिर तक पूछता रहा - "क्या हुआ? कुछ कहना चाहती हो?"
मैंने बस दो शब्द कहा - "कुछ नहीं"
और उससे मु मोड़ कर आंखों में आंसू लिए जाने लगी । क्या उसे समझ आया होगा मेरे "कुछ नहीं" का सही मतलब या सच में हमारे बीच "कुछ नहीं" ?