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बजरंगबली का चरित
जय श्री राम के प्यारे दुलारे,
संकट मोचन वीर हमारे।
अंजनीपुत्र पवनसुत बलवान,
जिनकी महिमा गाए जग-जान।
बाल्य में ही दिखा दी थी शक्ति,
सूर्य को समझ लिया था भक्ति।
गुरुजन से पाया विद्या का दान,
बुद्धि, विवेक बने पहचान।
राम कार्य के लिए जन्म लिया,
सीता खोज में वन-वन जिया।
लंका जलाकर दिखाई वीरता,
रामभक्ति में निहित समर्पिता।
संजीवनी पर्वत उठाकर लाए,
लक्ष्मण जीवन फिर से पाए।
श्रीराम संग किया संग्राम,
राक्षस दल सब हुए निष्काम।
निष्कलंक सेवा, नम्रता का रूप,
बजरंगबली हैं जग के ध्रुव।
जो भी पुकारे श्रद्धा से नाम,
दूर करें दुख, मिले सुखधाम।