आप कहते हो,
मैं बहुत शांत रहता हूँ |
कौन सा फ़साना है,
कहाँ खोया रहता हूँ |
आपकों नहीं पता ,
मैं बहुत सारी बाते करता हूँ|
पूरे दिन ,सारी रात करता हूँ,
हाँ, मै बाते अपने आप से करता हूँ |
कुछ काम की बाते,
और बहुत से फिजूल की बाते करता हूँ ,
मैं शांत तो बिल्कुल नहीं हूँ |
अच्छी बातों पर मुस्कराता हूँ,
बुरी बातों पर रूठ भी जाता हूँ,
और खुद को ही मना लेता हूँ |
लेकिन मैं बात तो करता हूँ,
मैं अपनी बातों से,
किसी को आहत भी नहीं करता ,
किसी की जज्बातों से बिना खेले,
अपने आप से ही कहता हूँ,
मैं बाते अपने आप से करता हूँ |
नीर रस: