मजबूर हैं ये हाथ, आप तक पैग़ाम भेजने को,
क्या करूँ, दिल मानता ही नहीं यादों के संग रहने को।
बीच का ये फ़ासला, दिल को और तड़पाता है,
काश ये बंधन न होता, तो प्यार और भी पास लाता है।
मन कहीं लगता ही नहीं, हर लम्हा अधूरा सा लगता है,
दूरी का डर हर रोज़ दिल को बेकरार करता है।
क्या करूँ… बहुत याद आते हो हर घड़ी, हर पल,
काश आप पास होते, तो दुनिया होती बिल्कुल सफल।
kajal Thakur 😊