"चाँदनी ने चाँद से कहा"
चाँदनी ने चाँद से कहा,
“तुम हर रात आकर मुझे रोशन क्यों करते हो?”
चाँद मुस्कराया,
“ताकि तुम्हारे बिना अँधेरा कभी घर में न समाए।”
तारों ने चाँदनी से कहा,
“तुम इतनी धीरे-धीरे बिखरती क्यों हो?”
चाँदनी हँसी और बोली,
“ताकि हर आँख में सपनों का नर्म उजाला बसे।”
पवन ने पत्तों से कहा,
“तुम हर सुबह नाचते क्यों हो?”
पत्तों ने गुनगुनाया,
“ताकि तुम्हारी हर साँस में हरे-भरे जीवन की खुशबू हो।”
नदी ने कंकड़ों से कहा,
“तुम हर लहर से मेरा रास्ता रोकते क्यों हो?”
कंकड़े बोले,
“ताकि तुम्हारे बहाव में संगीत और ताल हो।”
फूल ने धूप से कहा,
“तुम हर दिन मुझे गर्म क्यों करते हो?”
धूप बोली,
“ताकि तुम्हारी खुशबू और रंग हर दिल में खिल सके।”
चाँदनी ने हवाओं से कहा,
“तुम हर समय मेरे पास क्यों आते हो?”
हवा मुस्काई और बोली,
“ताकि तुम्हारी हल्की चमक दूर-दूर तक फैल सके।”
और तभी जंगल ने पूरा आसमान देखा,
तारों ने नदी को निहारते हुए कहा,
“देखो, ये जीवन संवादों से ही जीता है।”
हर फूल, हर पत्ता, हर नदी और चाँद—
अपने-अपने प्यार और ममता की भाषा में बात करते हैं।
और चाँदनी मुस्कराई,
“इस संसार में हर चीज़ का अपना संगीत है,
बस सुनने वाला दिल चाहिए।”
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Write-
Dharmendra Kumar