कभी सुबह कभी दोपहर रात को छत पर बैठे,
अपने एहसास जज़्बात को यूँही लिखता हूँ ।
कभी दुनियादारी के विचार लिखता हूँ,
तो कभी निजी जीवन के हिस्से लिखता हूँ ।
आस पास होती घटित घटनाएं लिखता हूँ,
दिनचर्या के खट्टे मीठे किस्से लिखता हूँ ।
प्रेम, करुणा, कोमल, निर्मल भाव लिखता हूँ,
कभी भक्ति और शक्ति का सार लिखता हूँ ।
लिखता रहूंगा जब तक धड़कन चलती रहेगी,
किताब बनने का शौक है इसलिए लिखता हूँ ।
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